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mahabharat 1.10.7: दुन्दुभ्य ने कहा - रूरो! पूर्वजन्म में मैं सहस्रपाद नामक ऋषि था; किन्तु एक ब्राह्मण के शाप के कारण मुझे सर्प का रूप धारण करना पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 1.10: रुरु मुनि और डुण्डुभका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 10: रुरु मुनि और डुण्डुभका संवाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.10.7 
डुण्डुभ उवाच
अहं पुरा रुरो नाम्ना ऋषिरासं सहस्रपात् ।
सोऽहं शापेन विप्रस्य भुजगत्वमुपागत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दुन्दुभ्य ने कहा - रूरो! पूर्वजन्म में मैं सहस्रपाद नामक ऋषि था; किन्तु एक ब्राह्मण के शाप के कारण मुझे सर्प का रूप धारण करना पड़ा।
 
Dundubhy said - Ruro! In my previous life I was a sage named Sahasrapada; but due to the curse of a Brahmin I had to take the form of a serpent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)