अव्यक्तोऽक्षर इत्युक्तस्तमाहु: परमां गतिम् ।
यं प्राप्य न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥ २१ ॥
अनुवाद
जिसे वेदान्ती लोग अव्यक्त और अच्युत कहते हैं, जिसे परम गति कहते हैं, जिसे प्राप्त होकर मनुष्य कभी वापस नहीं लौटता - वही मेरा परम धाम है।
That which the Vedantins describe as unmanifest and indestructible, which is the ultimate destination, after attaining which no one returns, that is my supreme abode.
तात्पर्य
अव्यक्त भगवान श्रीकृष्ण के श्रेष्ठ धाम को ब्रह्म-संहिता में चिंतामणि-धाम के रूप में वर्णित किया गया है, जो एक ऐसा स्थान है जहाँ सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। भगवान श्रीकृष्ण का श्रेष्ठ धाम, जिसे गोलोक वृंदावन के रूप में जाना जाता है, पारस पत्थर से बने महलों से भरा हुआ है। वहाँ पेड़ भी हैं, जिन्हें "इच्छा वृक्ष" कहा जाता है, जो माँग पर किसी भी प्रकार के खाने की आपूर्ति करते हैं, और वहाँ गायें हैं, जिन्हें सुरभि गाय के रूप में जाना जाता है, जो दूध की असीमित आपूर्ति करती हैं। इस धाम में, भगवान की सेवा हजारों लक्ष्मी देवियों द्वारा की जाती है, और उन्हें गोविंद, आदि भगवान और सभी कारणों का कारण कहा जाता है। भगवान अपनी बाँसुरी (वेणुं क्वणंतम्) बजाने के आदी हैं। उनका दिव्य स्वरूप सभी लोकों में सबसे आकर्षक है - उनकी आँखें कमल की पंखुड़ियों की तरह हैं, और उनके शरीर का रंग बादलों के रंग जैसा है। वह इतने आकर्षक हैं कि उनकी सुंदरता हजारों कामदेवों से भी बढ़कर है। वह केसरिया वस्त्र पहनते हैं, गले में माला और बालों में मोर पंख रखते हैं। भगवद्-गीता में भगवान श्रीकृष्ण अपने निजी धाम, गोलोक वृंदावन, जो आध्यात्मिक राज्य में सबसे श्रेष्ठ ग्रह है, का केवल एक छोटा संकेत देते हैं। ब्रह्म-संहिता में एक विशद वर्णन दिया गया है। वैदिक साहित्य (कठ उपनिषद 1.3.11) बताते हैं कि परम भगवान के धाम से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है, और वह धाम परम गंतव्य (पुरुषान न परं किंचित् सा काष्ठा परमा गतिः) है। जब कोई इसे प्राप्त कर लेता है, तो वह कभी भी भौतिक दुनिया में वापस नहीं आता है। कृष्ण का सर्वोच्च धाम और स्वयं कृष्ण एक जैसे ही होते हैं। इस पृथ्वी पर, वृंदावन, दिल्ली से नब्बे मील दक्षिण-पूर्व में, आध्यात्मिक आकाश में स्थित उस परम गोलोक वृंदावन की एक प्रतिकृति है। जब कृष्ण इस धाम पर अवतरित हुए, तो वह उसी विशिष्ट भूखंड वृंदावन पर खेलते थे, जो भारत के मथुरा जिले में लगभग 168 वर्ग मील में फैला हुआ है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥