इस श्लोक में योग-बलान शब्द का खास तौर पर इस्तेमाल बहुत महत्वपूर्ण है क्यूँकि योग के अभ्यास के बिना – चाहे वो षट्-चक्र-योग हो या भक्ति-योग – मृत्यु के समय कोई भी इस अलौकिक स्थिति को प्राप्त नहीं कर सकता। मृत्यु के समय कोई भी अचानक भगवान को याद नहीं कर सकता; किसी को भी किसी योग पद्धति की अनुभूति करनी होगी, खास तौर पर भक्ति-योग की। चूँकि मृत्यु के समय किसी का मन बहुत अशांत होता है, इसलिए अपने जीवन के दौरान किसी को योग के माध्यम से अतिक्रमण का अभ्यास करना चाहिए।
