ज्ञानी पुरुष भी अपने स्वभाव के अनुसार ही कर्म करता है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति तीनों गुणों से प्राप्त स्वभाव का ही अनुसरण करता है। दमन से क्या प्राप्त हो सकता है?
A wise man also acts according to his nature, because all beings follow their nature derived from the three Gunas. What can be achieved by suppression?
तात्पर्य
जब तक व्यक्ति कृष्ण चेतना के अत्योत्तर मंच पर नहीं स्थित होता है, तब तक वह भौतिक प्रकृति के रूपों के प्रभाव से मुक्त नहीं हो सकता, जैसा कि भगवान ने सातवें अध्याय (7.14) में पुष्टि की है। इसलिए, सांसारिक स्तर पर अत्यधिक शिक्षित व्यक्ति के लिए भी केवल सैद्धांतिक ज्ञान, या आत्मा को शरीर से अलग करके, माया के उलझाव से बाहर निकलना असंभव है। ऐसे कई तथाकथित अध्यात्मवादी हैं जो बाह्य रूप से विज्ञान में उन्नत होने का दिखावा करते हैं लेकिन आंतरिक रूप से या निजी तौर पर प्रकृति के विशेष रूपों के अधीन होते हैं जिन्हें वे पार करने में असमर्थ होते हैं। अकादमिक रूप से, कोई व्यक्ति बहुत विद्वान हो सकता है, लेकिन भौतिक प्रकृति के साथ अपने लंबे जुड़ाव के कारण, वह बंधन में है। कृष्ण चेतना भौतिक उलझाव से बाहर निकलने में मदद करती है, भले ही कोई भौतिक अस्तित्व के संदर्भ में अपने निर्धारित कर्तव्यों में लगा हो। इसलिए, कृष्ण चेतना में पूर्ण रूप से न होने पर किसी को अपने व्यावसायिक कर्तव्यों को नहीं छोड़ना चाहिए। किसी को भी अचानक अपने निर्धारित कर्तव्यों को नहीं छोड़ना चाहिए और कृत्रिम रूप से तथाकथित योगी या पारलौकिक बनना चाहिए। अपनी स्थिति में रहना और उच्च प्रशिक्षण के तहत कृष्ण चेतना प्राप्त करने का प्रयास करना बेहतर है। इस प्रकार व्यक्ति कृष्ण की माया के चंगुल से मुक्त हो सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥