vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् भगवद्-गीता
»
अध्याय 16: दैवी तथा आसुरी स्वभाव
»
श्लोक 4
श्लोक
16.4
दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोध: पारुष्यमेव च ।
अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम् ॥ ४ ॥
अनुवाद
हे पृथापुत्र! अभिमान, अहंकार, दंभ, क्रोध, कठोरता और अज्ञान - ये गुण आसुरी प्रकृति के हैं।
O son of Pritha! Arrogance, arrogance, pride, anger, harshness and ignorance – these are the qualities of people of demonic nature.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×