भजति शब्द बहुत महत्वपूर्ण है। कई जगहों पर भजति शब्द का प्रयोग सर्वोच्च भगवान की सेवा के संबंध में किया गया है। यदि कोई व्यक्ति पूर्ण कृष्ण चेतना में लगा हुआ है, भगवान की भक्तिमय सेवा में, तो यह समझना होगा कि वह सभी वैदिक ज्ञान को समझ चुका है। वैष्णव परंपरा में कहा गया है कि यदि कोई कृष्ण की भक्तिमय सेवा में लगा हुआ है, तो सर्वोच्च निरपेक्ष सत्य को समझने के लिए किसी अन्य आध्यात्मिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है। वह पहले ही उस बिंदु पर आ चुका है, क्योंकि वह भगवान की भक्तिमय सेवा में लगा हुआ है। उसने समझने की सभी प्रारंभिक प्रक्रियाओं को समाप्त कर दिया है। लेकिन अगर कोई सैकड़ों हजारों जीवन के बाद भी अनुमान लगाता रहता है, तो इस मुकाम तक नहीं पहुँचता कि कृष्ण ही सर्वोच्च भगवान हैं और वहीं आत्मसमर्पण करना है, तो इतने वर्षों और जन्मों तक उसका सारा अनुमान समय की बर्बादी है।
