Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 gita 11.18: आप परम आदि पुरुष हैं। आप ही इस समस्त ब्रह्माण्ड के परम विश्रामस्थान हैं। आप अक्षय हैं, और आप ही सबसे प्राचीन हैं। आप ही सनातन धर्म के पालनकर्ता, भगवान हैं। यही मेरा मत है। | अध्याय 11: विराट रूप । श्रीमद् भगवद्-गीता Srimad Bhagavad Gita | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वमक्षरं परमं वेदितव्यं
त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् ।
त्वमव्यय: शाश्वतधर्मगोप्ता
सनातनस्त्वं पुरुषो मतो मे ॥ १८ ॥
अनुवाद
आप परम आदि पुरुष हैं। आप ही इस समस्त ब्रह्माण्ड के परम विश्रामस्थान हैं। आप अक्षय हैं, और आप ही सबसे प्राचीन हैं। आप ही सनातन धर्म के पालनकर्ता, भगवान हैं। यही मेरा मत है।
You are the ultimate primal and knowable thing. You are the ultimate support of this universe. You are indestructible and the ancient man. You are the protector of Sanatan Dharma. This is my opinion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥