श्रीमद् भगवद्-गीता  »  अध्याय 1: युद्धस्थल परीक्षण एवं अर्जुन विषाद योग  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.23 
योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः ।
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
मैं उन लोगों को देखूं जो दुष्ट बुद्धि वाले धृतराष्ट्र पुत्र को प्रसन्न करने की इच्छा से यहां युद्ध करने आये हैं।
 
Let me see those who have come here to fight with the desire to please the evil-minded son of Dhritarashtra (Duryodhana).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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