राजा कहे , - “तारे आमि दुःख नाहि दिये ।
चाङ्गे चड़ा, खड्गे डारा, - आमि ना जानिये ॥98॥
अनुवाद
राजा ने उत्तर दिया, "मुझे गोपीनाथ पटनायक और उनके परिवार को कष्ट देने की कोई इच्छा नहीं थी, न ही मुझे यह पता था कि उन्हें चंग पर चढ़ाकर तलवारों पर फेंका जाएगा और मार दिया जाएगा।
The king replied, “I did not want to cause pain to Gopinath Patnaik and his family, nor did I know that he would be killed by being crucified and thrown on swords.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥