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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना
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श्लोक 7
श्लोक
3.8.7
हेन - काले रामचन्द्र - पुरी - गोसाञि आइला ।
परमानन्द - पुरीरे आर प्रभुरे मिलिला ॥7॥
अनुवाद
तब रामचन्द्र पुरी गोसानी नामक एक संन्यासी परमानंद पुरी और श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने आये।
Then a monk named Ramchandra Puri Gosain came to meet Paramananda Puri and Sri Chaitanya Mahaprabhu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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