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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना
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श्लोक 56
श्लोक
3.8.56
रामचन्द्र - पुरीके सबाय देय तिरस्कार ।
‘एइ पापिष्ठ आ सि’ प्राण लइल सबार’ ॥56॥
अनुवाद
सभी भक्तों ने रामचन्द्र पुरी की निंदा करते हुए कहा, “यह पापी आदमी यहाँ आया है और हमारे प्राण ले गया है।”
All the devotees cursed Ramchandra Puri saying, “This sinful person has come here and has taken away our lives.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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