श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 8: रामचन्द्र पुरी द्वारा महाप्रभु की आलोचना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.8.23 
‘कृष्ण ना पाइनु, ना पाइनु ‘मथुरा’ ।
आपन - दुःखे मरों - एइ दिते आइल ज्वाला ॥23॥
 
 
अनुवाद
"हे मेरे भगवान कृष्ण, मैं न तो आप तक पहुँच सका, न ही आपके धाम मथुरा तक पहुँच सका। मैं अपने दुःख में मर रहा हूँ, और अब यह दुष्ट मुझे और अधिक पीड़ा देने आया है।
 
"O Lord Krishna! I have neither been able to reach you nor your abode in Mathura. I am dying in my grief, and this fool has come to torment me further."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)