‘कृष्ण ना पाइनु, ना पाइनु ‘मथुरा’ ।
आपन - दुःखे मरों - एइ दिते आइल ज्वाला ॥23॥
अनुवाद
"हे मेरे भगवान कृष्ण, मैं न तो आप तक पहुँच सका, न ही आपके धाम मथुरा तक पहुँच सका। मैं अपने दुःख में मर रहा हूँ, और अब यह दुष्ट मुझे और अधिक पीड़ा देने आया है।
"O Lord Krishna! I have neither been able to reach you nor your abode in Mathura. I am dying in my grief, and this fool has come to torment me further."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥