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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट
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श्लोक 148
श्लोक
3.7.148
वल्लभ - भट्टेर हय वात्सल्य - उपासन ।
बाल - गोपाल - मन्त्रे तेंहो करेन सेवन ॥148॥
अनुवाद
वल्लभ भट्ट बाल कृष्ण के रूप में भगवान की पूजा करने के आदी थे। इसलिए उन्होंने बालगोपाल मंत्र की दीक्षा ली थी और इस प्रकार भगवान की पूजा कर रहे थे।
Vallabha Bhatta worshipped Lord Krishna in his child form. Therefore, he was initiated into the Balagopal mantra and worshipped the Lord in this form.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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