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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट
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श्लोक 103
श्लोक
3.7.103
एक - दिन भट्ट पुछिल आचार्येरे ।
“जीव - ‘प्रकृति’ ‘पति’ करि’ मानये कृष्णेरे” ॥103॥
अनुवाद
एक दिन वल्लभ भट्ट ने अद्वैत आचार्य से कहा, "प्रत्येक जीव स्त्री [प्रकृति] है और कृष्ण को अपना पति [पति] मानती है।"
One day Vallabha Bhatta said to Advaita Acharya, “Every living being is Prakriti (woman) and she considers Krishna as her husband.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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