श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  3.6.96 
पुष्य - माला विप्न आनि’ प्रभु - गले दिल ।
चन्दन आनिया प्रभुर सर्वाङ्गे लेपिल ॥96॥
 
 
अनुवाद
तब एक ब्राह्मण ने फूलों की माला लाकर नित्यानंद प्रभु के गले में पहना दी और उनके पूरे शरीर पर चंदन का लेप कर दिया।
 
Then a Brahmin brought a garland of flowers, placed it around Nityananda Prabhu's neck and applied sandalwood paste all over his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)