श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  3.6.77 
सकल - लोकेर चिड़ा पूर्ण यबे हइल ।
ध्याने तबे प्रभु महाप्रभुरे आनिल ॥77॥
 
 
अनुवाद
जब सभी को चावल परोसे जा चुके, तब भगवान नित्यानंद प्रभु ध्यानमग्न होकर श्री चैतन्य महाप्रभु को लेकर आए।
 
When everyone had been served chiwda, Nityananda Prabhu brought Sri Chaitanya Mahaprabhu into meditation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)