श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.6.47 
शुनि’ प्रभु कहे, - “चोरा दिलि दरशन ।
आय, आय, आजि तोर करिमु दण्डन” ॥47॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर भगवान नित्यानंद प्रभु बोले, "तू चोर है। अब तू मुझसे मिलने आया है। इधर आ, इधर आ। आज मैं तुझे दण्ड दूँगा!"
 
Hearing this, Nityananda Prabhu said, "You are a thief. Now you have come to see me. Come here, come here. Today I will punish you!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)