श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.6.37 
एइ - मते बारे बारे पलाय, धरि’ आने ।
तबे ताँर माता कहे ताँर पिता सने ॥37॥
 
 
अनुवाद
यह लगभग रोज़ की बात हो गई थी। रघुनाथ घर से भाग जाते और उनके पिता उन्हें वापस ले आते। तब रघुनाथ दास की माँ ने उनके पिता से इस प्रकार कहा।
 
This became almost a daily routine. Raghunath would run away from home and his father would bring him back. Then Raghunath Das's mother told his father (her husband).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)