एइ - मत महाप्रभु भक्त - गण लञा ।
नीलाचले विहरये भक्ति प्रचारिया ॥90॥
अनुवाद
इस प्रकार भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने सहयोगियों, अपने शुद्ध भक्तों के साथ जगन्नाथ पुरी [नीलाचल] में अनेक प्रकार से भक्ति पंथ का प्रचार करके दिव्य आनंद का आनंद लिया।
In this way, Sri Chaitanya Mahaprabhu, along with His associates, His pure devotees, enjoyed transcendental bliss while propagating various forms of Bhakti Sampradaya at Jagannatha Puri (Nilachal).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥