श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  3.5.77 
प्रभु कहे, - “रामानन्द विनयेर खनि” ।
आपनार कथा पर - मुण्डे देन आनि’ ॥77॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "रामानंद राय महान विनम्रता की खान हैं। इसलिए उन्होंने अपने शब्दों को किसी और की बुद्धि का परिणाम बताया है।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "Ramananda Raya is the embodiment of all humility. That is why he has imposed his words on the intellect of another."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)