vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना
»
श्लोक 77
श्लोक
3.5.77
प्रभु कहे, - “रामानन्द विनयेर खनि” ।
आपनार कथा पर - मुण्डे देन आनि’ ॥77॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "रामानंद राय महान विनम्रता की खान हैं। इसलिए उन्होंने अपने शब्दों को किसी और की बुद्धि का परिणाम बताया है।"
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "Ramananda Raya is the embodiment of all humility. That is why he has imposed his words on the intellect of another."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×