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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना
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श्लोक 29
श्लोक
3.5.29
बहु - क्षण आइला, मोरे केह ना कहिल ।
तोमार चरणे मोर अपराध हइल ॥29॥
अनुवाद
"महाराज, आप यहाँ बहुत पहले आ गए थे, पर किसी ने मुझे बताया नहीं। इसलिए मैं आपके चरणकमलों का अपराधी अवश्य बन गया हूँ।"
"O Sir, you came here a long time ago, but no one informed me. So I am certainly guilty at your feet."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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