श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 5: प्रद्युम्न मिश्र का रामानन्द राय से उपदेश लेना  »  श्लोक 143
 
 
श्लोक  3.5.143 
जरासन्ध कहे , - “कृष्ण - पुरुष - अधम” ।
तोर सङ्गे ना युझिमु, “याहि बन्धु - हन्” ॥143॥
 
 
अनुवाद
राक्षस जरासंध ने कृष्ण को डाँटते हुए कहा, 'तुम मनुष्यों में सबसे नीच हो। मैं तुमसे युद्ध नहीं करूँगा, क्योंकि तुमने अपने ही रिश्तेदारों को मार डाला है।'
 
The demon Jarasandha rebuked Krishna, saying, "You are the worst of men. I will not fight you, because you have killed your own relatives."
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