Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 222
 
 
श्लोक  3.4.222 
आर यत ग्रन्थ कैला, ताहा के करे गणन ।
‘मदन - गोपाल - गोविन्देर सेवा’ - प्रकाशन ॥222॥
 
 
अनुवाद
श्रील सनातन गोस्वामी ने कई अन्य ग्रंथों का भी संकलन किया। उनकी गणना कौन कर सकता है? इन सभी ग्रंथों का मूल सिद्धांत हमें मदनमोहन और गोविंदजी से प्रेम करना सिखाना है।
 
Srila Sanatana Goswami also compiled many other texts. Who can count them? The fundamental principle of these texts is to teach us how to love Madanmohan and Govindji.
तात्पर्य
भक्ति रत्नाकर, श्रील सनातन गोस्वामी की निम्न पुस्तकों की चर्चा करता है: (1) बृहद भगवतामृत, (2) हरि-भक्ति-विलास और उसकी टीका जिसे दिग-दर्शिनी के नाम से जाना जाता है, (3) लीला स्तव और (4) श्रीमद्-भागवतम के दसवें सर्ग पर टीका जिसे वैष्णव-तोषणी के नाम से जाना जाता है. सनातन गोस्वामी ने अनगिनत पुस्तकों का संकलन किया, जिनमें से सभी का उद्देश्य यह वर्णन करना था कि वृन्दावन की प्रमुख देवताओं की सेवा कैसे की जाए - गोविंद और मदन-गोपाल. बाद में, धीरे-धीरे अन्य देवताओं की स्थापना की गई, और वृन्दावन का महत्व बढ़ता गया.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)