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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 211
 
 
श्लोक  3.4.211 
महाप्रभुर भक्त - गणे सबारे मिलिया ।
सेइ - पथे च लि’ याय से स्थान देखिया ॥211॥
 
 
अनुवाद
सनातन गोस्वामी ने श्री चैतन्य महाप्रभु के सभी भक्तों से मुलाकात की और फिर उसी मार्ग से यात्रा करते हुए उन स्थानों का दौरा किया जहां से श्री चैतन्य महाप्रभु गुजरे थे।
 
Sanatana Goswami met all the devotees of Sri Chaitanya Mahaprabhu and then travelled the same route and saw the places through which Sri Chaitanya Mahaprabhu had passed.
तात्पर्य
श्रील भक्तिविनाेद ঠाकुर के पद (शरणागति 31.3) में लिखा है:

गौरा ामार, ये सब स्थाने

कराल भ्रमण रँगे

से-सब स्थान, हेरिबा आमि

प्रणयी-भक्त-संगे

"मैं भगवान चैतन्य और उनके भक्तों की लीलाओं से जुड़े सभी पवित्र स्थानों की यात्रा करूँ।" एक भक्त को उन सभी स्थानों की यात्रा अवश्य करनी चाहिए जहाँ श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने लीलाएँ की थी। वास्तव में, श्री चैतन्य महाप्रभु के शुद्ध भक्त तो उन जगहों को भी देखना चाहते हैं जहाँ वे कुछ घंटों या मिनटों के लिए ही गए थे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)