"कस्तूरिकाया द्बौ भागौ, चत्वारश चंदनस्य तु।
कुंकुमस्य त्रयश चैकः, शशिनाह स्यात चतुष-समम्।।"
"कस्तूरी के दो भाग, चंदन के चार, अगरु या केसर के तीन और कपूर का एक भाग - जब ये सब साथ मिलाए जाते हैं, तो चतुःसम बनता है।" चतुःसम की सुगंध बहुत अच्छी होती है। इसका वर्णन हरि-भक्ति-विलास (छठे विलास) में भी किया गया है।
