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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 194
 
 
श्लोक  3.4.194 
मर्यो यदा त्यक्त - समस्त - कर्मा निवेदितात्मा विचिकीर्षितो मे ।
तदामृतत्वं प्रतिपद्यमानो मयात्म - भूयाय च कल्पते वै ॥194॥
 
 
अनुवाद
"जन्म-मरण से ग्रस्त जीवात्मा जब समस्त भौतिक कर्मों का त्याग कर देता है, अपना जीवन मेरी आज्ञा के पालन में समर्पित कर देता है और मेरे निर्देशों के अनुसार कार्य करता है, तो उसे अमरता प्राप्त होती है। इस प्रकार वह मेरे साथ प्रेम-संभोग से प्राप्त आध्यात्मिक आनंद का आनंद लेने के योग्य हो जाता है।"
 
"When a being, subject to birth and death, renounces all material pursuits, dedicating his life to Me in order to fulfill My commands, and thus acts according to My commands, he attains the state of immortality. Then he becomes capable of enjoying spiritual bliss in the exchange of love with Me."
तात्पर्य
ये श्रीमद्‌ भागवतम् (11.29.34) का उद्घरण है। दीक्षा के समय, एक भक्त अपनी सभी भौतिक अवधारणाओं को त्याग देता है। इसलिए, भगवान के परम व्यक्तित्व के संपर्क में होने के कारण, वह दिव्य पटल पर स्थित होता है। इस प्रकार ज्ञान और आध्यात्मिक पटल को प्राप्त करने के बाद, वह हमेशा कृष्ण के आध्यात्मिक शरीर की सेवा में लगा रहता है। जब कोई इस तरह से भौतिक संबंधों से मुक्त हो जाता है, तो उसका शरीर तुरंत आध्यात्मिक हो जाता है, और कृष्ण उसकी सेवा स्वीकार करते हैं। हालाँकि, कृष्ण जीवन की भौतिक अवधारणा वाले व्यक्ति से कुछ भी स्वीकार नहीं करते हैं। जब एक भक्त को अब भौतिक इंद्रिय संतुष्टि की कोई इच्छा नहीं रह जाती है, तो अपनी आध्यात्मिक पहचान में वह प्रभु की सेवा में संलग्न हो जाता है, क्योंकि उसकी निष्क्रिय आध्यात्मिक चेतना जागृत हो जाती है। आध्यात्मिक चेतना के इस जागरण से उसका शरीर आध्यात्मिक हो जाता है, और इस प्रकार वह प्रभु की सेवा करने के योग्य हो जाता है। कर्मी भक्त के शरीर को भौतिक मान सकते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है, क्योंकि एक भक्त में भौतिक आनंद की कोई अवधारणा नहीं होती है। अगर कोई सोचता है कि एक शुद्ध भक्त का शरीर भौतिक है, तो वह अपराधी है, क्योंकि वह वैष्णव-अपराध है। इस संबंध में श्रील सनातन गोस्वामी के बृहद-भागवतामृत (1.3.45 और 2.3.139) का अवलोकन करना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)