श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 167
 
 
श्लोक  3.4.167 
काहाँ तुमि - प्रामाणिक, शास्त्रे प्रवीण! ।
काहाँ जगा - कालिकार बटुया नवीन! ॥167॥
 
 
अनुवाद
“आप शास्त्रों के अनुभवी विद्वान हैं, जबकि जग तो एक छोटा बालक है।
 
“You are an experienced scholar of the scriptures, while Jaga is only a young boy.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)