श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 4: जगन्नाथ पुरी में महाप्रभु से सनातन गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.4.11 
जगन्नाथ रथ - यात्राय हइबेन बाहि र ।
ताँर रथ - चाकाय छाड़िमु एइ शरीर ॥11॥
 
 
अनुवाद
“रथ-यात्रा उत्सव के दौरान, जब भगवान जगन्नाथ मंदिर से बाहर आएंगे, तो मैं उनके रथ के पहिये के नीचे यह शरीर त्याग दूँगा।
 
“During the Rath Yatra festival, when Lord Jagannath comes out of the temple, I will leave my body under the wheels of his chariot.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)