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श्लोक 3.20.87  |
चैतन्य - मङ्गले इहा लिखियाछे स्थाने - स्थाने ।
सत्य कहेन , - ‘आगे व्यास करिब वर्णने’ ॥87॥ |
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| अनुवाद |
| चैतन्यमंगल में श्रील वृन्दावनदास ठाकुर ने अनेक स्थानों पर यह तथ्यात्मक सत्य कहा है कि भविष्य में व्यासदेव भगवान की लीलाओं का विस्तृत वर्णन करेंगे। |
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| In Chaitanya Mangala, Srila Vrindavana Dasa Thakura has written this true truth at many places that Vyasadeva will describe in detail in the future. |
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