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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.20.87 
चैतन्य - मङ्गले इहा लिखियाछे स्थाने - स्थाने ।
सत्य कहेन , - ‘आगे व्यास करिब वर्णने’ ॥87॥
 
 
अनुवाद
चैतन्यमंगल में श्रील वृन्दावनदास ठाकुर ने अनेक स्थानों पर यह तथ्यात्मक सत्य कहा है कि भविष्य में व्यासदेव भगवान की लीलाओं का विस्तृत वर्णन करेंगे।
 
In Chaitanya Mangala, Srila Vrindavana Dasa Thakura has written this true truth at many places that Vyasadeva will describe in detail in the future.
तात्पर्य
आगे व्यास करिबा वर्णने यह कथन चैतन्य-भागवत (आदि खंड, प्रथम अध्याय, पद 180) में दिए गए एक पद के समान है जिसमें वृंदावन दास ठाकुर कहते हैं:

शेष-खंडे चैतन्येरा अनंत विलास

विस्तारिया वर्णिते आछेना वेद-व्यास

"श्री चैतन्य महाप्रभु के असीम लीलाओं का भविष्य में व्यासदेव वर्णन करेंगे।" श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर कहते हैं कि इन कथनों से यह संकेत मिलता है कि भविष्य में व्यासदेव के अन्य प्रतिनिधि भगवान चैतन्य की लीलाओं का विस्तार से वर्णन करेंगे। तात्पर्य यह है कि वैष्णवों की शिष्य परंपरा में कोई भी शुद्ध भक्त जो श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं का वर्णन करता है, उसे व्यासदेव के प्रतिनिधि के रूप में पुष्टि की जाती है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)