श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  3.20.84 
ये किछु वर्णिलुँ, सेह सङ्क्षेप करिया ।
लिखिते ना पारेन, तबु राखियाछेन लिखिया ॥84॥
 
 
अनुवाद
मैंने जो वर्णन किया है, वह वृन्दावन दास ठाकुर द्वारा छोड़ दिया गया था, किन्तु यद्यपि वे इन लीलाओं का वर्णन नहीं कर सके, फिर भी उन्होंने हमें एक सारांश दिया।
 
The passage I have described was left by Vrindavana Dasa Thakura.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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