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अनुवाद
वृन्दावन दास ठाकुर भगवान नित्यानंद के प्रिय भक्त हैं, और इसलिए वे श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं का वर्णन करने वाले मूल व्यासदेव हैं।
Vrindavana Dasa Thakura is a beloved devotee of Sri Nityananda Prabhu, and therefore he is the original Vyasadeva in describing the pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर कहते हैं कि वृंदावन दास ठाकुर के बाद के सभी लेखक जो श्री चैतन्य महाप्रभु के शुद्ध भक्त हैं और जिन्होंने भगवान की गतिविधियों का वर्णन करने की कोशिश की है, उन्हें व्यास की तरह माना जाना चाहिए। श्रील वृंदावन दास ठाकुर चैतन्य-लीला का वर्णन करने वाले मूल व्यासदेव हैं, और अन्य सभी जो उनके नक्शे कदम पर चलते हैं और श्री चैतन्य महाप्रभु के मनोरंजनों का वर्णन करते हुए उन्हें भी व्यासदेव कहा जाना चाहिए। प्रामाणिक आध्यात्मिक गुरु को व्यास कहा जाता है क्योंकि वह व्यास का प्रतिनिधि होता है। ऐसे आध्यात्मिक गुरु के जन्मदिन की आराधना को व्यास-पूजा कहा जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥