श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  3.20.76 
ये किछु करिलुँ एइ दिग्दरशन ।
एइ अनुसारे हबे तार आस्वादन ॥76॥
 
 
अनुवाद
मैंने जो वर्णन किया है, वह केवल संकेत मात्र है, किन्तु इस संकेत का अनुसरण करने से श्री चैतन्य महाप्रभु की समस्त लीलाओं का आस्वाद प्राप्त हो सकता है।
 
Whatever I have said is just a hint, but by following this hint one can enjoy all the Leelas of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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