कुष्ठी - विप्रेर रमणी, पतिव्रता - शिरोमणि
पति ला गि’ कैला वेश्यार सेवा ।
स्तम्भिल सूर्येर गति, जीयाइल मृत पति
तुष्ट कैल मुख्य तिन - देवा ॥57॥
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अनुवाद
"एक कुष्ठ रोग से पीड़ित ब्राह्मण की पत्नी ने अपने पति की संतुष्टि के लिए एक वेश्या की सेवा करके स्वयं को सभी पतिव्रता स्त्रियों में सर्वश्रेष्ठ सिद्ध किया। इस प्रकार उसने सूर्य की गति रोक दी, अपने मृत पति को पुनर्जीवित किया और तीनों प्रमुख देवताओं [ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर] को संतुष्ट किया।"
"The wife of a leprosy-stricken brahmana revealed herself as the ultimate sati by serving a prostitute to appease her husband. In this way, she stopped the movement of the sun, brought her dead husband back to life, and appeased the three principal gods (Brahma, Vishnu, and Maheshwara).
तात्पर्य
आदित्य पुराण, मार्कण्डेय पुराण और पद्म पुराण में एक ऐसे ब्राह्मण के बारे में बताया गया है जो कुष्ठ रोग से पीड़ित था लेकिन जिसकी एक बहुत ही पतिव्रता और वफ़ादार पत्नी थी। वह एक वेश्या के साथ रहने की इच्छा करता था, और इसलिए उसकी पत्नी उसके पास गयी और उसकी नौकरानी बन गयी, ताकि वह उसकी तरफ सेवा के लिए ध्यान आकर्षित कर सके। जब वेश्या उसके साथ रहने के लिए मान गयी, तो पत्नी अपने कोढ़ी पति को उसके पास ले गयी। जब उस पापी ब्राह्मण पुत्र कोढ़ी ने अपनी पत्नी की पतिव्रता देखा, तो उसने आखिरकार अपने पापी इरादों को त्याग दिया। हालांकि, घर आते समय, उसने मार्कण्डेय ऋषि के शरीर को छुआ, जिससे उन्होंने उसे सूर्योदय के समय मरने का श्राप दिया। अपनी पतिव्रता के कारण, वह महिला बहुत शक्तिशाली थी। इसलिए जब उसने श्राप के बारे में सुना, तो उसने सूर्योदय को रोकने की कसम खाई। अपने पति की सेवा करने के लिए उसके दृढ़ संकल्प के कारण, तीन देवता - अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर - बहुत खुश हुए, और उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया कि उसके पति को ठीक किया जाएगा और उसे वापस लाया जाएगा। यह उदाहरण यहाँ इस बात पर जोर देने के लिए दिया गया है कि एक भक्त को व्यक्तिगत उद्देश्यों के बिना खुद को विशेष रूप से कृष्ण की संतुष्टि के लिए समर्पित करना चाहिए। यह उसके जीवन को सफल बनाएगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥