कान्ता कृष्णे करे रोष, कृष्ण पाय सन्तोष
सुख पाय ताड़न - भर्सने ।
यथा - योग्य करे मान, कृष्ण ताते सुख पान
छाड़े मान अल्प - साधने ॥54॥
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अनुवाद
"जब कोई प्रिय गोपी कृष्ण के प्रति क्रोध के लक्षण प्रदर्शित करती है, तो कृष्ण अत्यंत संतुष्ट होते हैं। वास्तव में, ऐसी गोपी द्वारा दंडित किए जाने पर वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं। वह अपना अभिमान उचित रूप से प्रदर्शित करती है, और कृष्ण उस भाव का आनंद लेते हैं। फिर वह थोड़े से प्रयास से अपना अभिमान त्याग देती है।
“When a beloved gopi expresses anger towards Krishna, Krishna becomes extremely pleased.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥