| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ » श्लोक 150 |
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| | | | श्लोक 3.20.150  | सब श्रोता - गणेर करि चरण वन्दन ।
याँ - सबार चरण - कृपा - शुभेर कारण ॥150॥ | | | | | | | अनुवाद | | अब मैं अपने सभी पाठकों के चरणकमलों की पूजा करता हूँ, क्योंकि उनके चरणकमलों की कृपा से ही सब प्रकार का कल्याण होता है। | | | | Now I bow to the lotus feet of all my readers, because by the grace of their feet all good fortunes arise. | | ✨ ai-generated | | |
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