एक-देशम् तु वेदस्य वेदांगाण्य पि वा पुनः
योऽध्यापयति वृत्ति-अर्थम उपाध्यायः स उच्यते
"जो व्यक्ति दूसरों को वेदों अथवा वेदों के पूरक साहित्यों का एक भाग सिखाता है उसे उपाध्याय कहा जा सकता है।" उपाध्याय उस व्यक्ति को भी संदर्भित करता है जो कला सिखाता है।
