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श्लोक 3.20.138  |
विंश - परिच्छेदे - निज - ‘शिक्षाष्टक’ पड़िया ।
तार अर्थ आस्वादिला प्रेमाविष्ट हञा ॥138॥ |
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| अनुवाद |
| बीसवें अध्याय में बताया गया है कि किस प्रकार भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपने आठ उपदेशों का पाठ किया और आनंदित प्रेम में उनके अर्थ का रसास्वादन किया। |
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| In the twentieth chapter, Sri Chaitanya Mahaprabhu recited his own Shikshashtakam and savored its meaning in a passionate love. |
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