श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  3.20.137 
वसन्त - रजनीते पुष्पोद्याने विहरण ।
कृष्णेर सौरभ्य - श्लोकेर अर्थ - विवरण ॥137॥
 
 
अनुवाद
उस अध्याय में कृष्ण के वसंत की रात में बगीचे में विचरण करने का भी वर्णन है, तथा इसमें कृष्ण के शरीर की सुगंध के बारे में एक श्लोक का अर्थ भी पूर्ण रूप से वर्णित है।
 
This chapter also describes Krishna wandering in a garden on a spring night. It also fully explains the meaning of a verse about the fragrance of Krishna's body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)