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श्लोक 3.20.127  |
तार मध्ये प्रभुर पञ्चेन्द्रिय - आकर्षण ।
तार मध्ये करिला रासे कृष्ण - अन्वेषण ॥127॥ |
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| अनुवाद |
| उस अध्याय में भगवान चैतन्य की पांच इंद्रियों का कृष्ण के प्रति आकर्षण तथा रास नृत्य में किस प्रकार उन्होंने कृष्ण की खोज की, इसका भी वर्णन है। |
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| In this chapter, the attraction of Sri Chaitanya Mahaprabhu's five senses towards Krishna and his search for Krishna in the Raas dance have been described. |
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