श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  3.20.119 
एकादशे - हरिदास - ठाकुरेर निर्याण ।
भक्त - वात्सल्य याहाँ देखाइला गौर भगवान् ॥119॥
 
 
अनुवाद
ग्यारहवें अध्याय में हरिदास ठाकुर के अन्तर्धान होने तथा भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा अपने भक्तों के प्रति स्नेह प्रदर्शित करने का वर्णन है।
 
The eleventh chapter describes the disappearance of Haridasa Thakura and the affection shown by the Supreme Personality of Godhead, Sri Chaitanya Mahaprabhu, towards His devotees.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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