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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 114
श्लोक
3.20.114
सप्तम - परिच्छेदे वल्लभ भट्टर मिलन ।
नाना - मते कैला ताँर गर्व खण्डन ॥114॥
अनुवाद
सातवां अध्याय बताता है कि कैसे श्री चैतन्य महाप्रभु ने वल्लभ भट्ट से मुलाकात की और विभिन्न तरीकों से उनके झूठे गौरव को नष्ट किया।
The seventh chapter describes the meeting of Sri Chaitanya Mahaprabhu with Vallabha Bhatta and the refutation of his false pride in many ways.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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