श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 20: शिक्षाष्टक प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  3.20.106 
तृतीये - हरिदासेर महिमा प्रचण्ड ।
दामोदर - पण्डित कैला प्रभुरे वाक्य - दण्ड ॥106॥
 
 
अनुवाद
तीसरे अध्याय में हरिदास ठाकुर की ओजस्वी महिमा का वर्णन है। इस अध्याय में यह भी उल्लेख है कि कैसे दामोदर पंडित ने श्री चैतन्य महाप्रभु की आलोचना की थी।
 
The third chapter describes the immense glories of Haridasa Thakura. It also mentions how Damodara Pandit criticized Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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