श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.2.79 
एइ - मत शची - गृहे सतत भोजन ।
श्रीवासेर गृहे करेन कीर्तन - दर्शन ॥79॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु प्रतिदिन शचीमाता के मंदिर में भोजन करते थे और कीर्तन के समय श्रीवास ठाकुर के घर भी जाते थे।
 
In this way Sri Chaitanya Mahaprabhu used to eat food daily in the temple of Shachimata and also used to go to Srivasa Thakura's house when kirtan was going on.
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