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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  3.2.5-6 
‘साक्षात्दर्शने’ प्राय सब निस्तारिला ।
नकुल - ब्रह्मचारीर देहे ‘आविष्ट’ हइला ॥5॥
प्रद्युम्न - नृसिंहानन्द आगे कैला ‘आविर्भाव’ ।
‘लोक निस्तारिब’, - एइ ईश्वर - स्वभाव ॥6॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने लगभग सभी पतित आत्माओं का प्रत्यक्ष दर्शन करके उद्धार किया। उन्होंने नकुल ब्रह्मचारी जैसे महान भक्तों के शरीर में प्रवेश करके अन्य आत्माओं का उद्धार किया। और उन्होंने नृसिंहानंद ब्रह्मचारी के रूप में, उनके समक्ष प्रकट होकर भी अन्य आत्माओं का उद्धार किया। "मैं पतित आत्माओं का उद्धार करूँगा।" यह कथन भगवान के परम व्यक्तित्व की विशेषता है।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu saved almost all fallen souls by meeting them in person. He saved others by entering the bodies of great devotees like Nakula Brahmachari and appearing before Nrisimhananda Brahmachari. “I will save fallen souls” – this statement is indicative of the nature of the Supreme Personality of Godhead.
तात्पर्य
प्रभु हमेशा निम्नलिखित चार स्थानों पर अपना अवीरभाव प्रकट करते हैं: (१) श्रीमती सचीमाता का घर। (२) जहाँ कहीं भी नित्यानंद प्रभु ने वशीभूत होकर नृत्य किया। (३) श्रीवास का घर (जहाँ कीर्तन किया गया था), और (४) राघव पंडित का घर। स्वयं भगवान चैतन्य इन चार स्थानों पर प्रकट हुए। (इस संबंध में, पाठ 34 से परामर्श किया जा सकता है।)
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)