श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  3.2.105 
प्रभु लेखा करे यारे - राधिकार ‘गण’ ।
जगतेर मध्ये ‘पात्र’ - साड़े तिन जन ॥105॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उन्हें श्रीमती राधारानी की पूर्व सहचरी मानकर स्वीकार किया। सम्पूर्ण जगत में साढ़े तीन व्यक्ति उनके अनन्य भक्त थे।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu accepted her as a former companion of Srimati Radharani. He had a total of three and a half close devotees in the entire world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)