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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 2: छोटे हरिदास को दण्ड  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.2.10 
सप्त - द्वीपेर लोक आर नव - खण्ड - वासी ।
देव, गन्धर्व, किन्नर मनुष्य - वेशे आ सि’ ॥10॥
 
 
अनुवाद
सात द्वीपों, नौ खंडों, देवताओं के लोकों, गंधर्वलोक और किन्नरलोक सहित पूरे ब्रह्मांड से लोग मानव रूप में वहां जाएंगे।
 
People from all over the universe, including the seven islands, the nine regions, the Deva Loka, the Gandharva Loka and the Kinnar Loka, go there in human form.
तात्पर्य
सप्त-द्वीप का वर्णन मध्य-लीला, अध्याय बीस, पद्य 218 और श्रीमद-भागवतम, पंचम स्कंद के सोलहवें और बीसवें अध्याय में किया गया है। सिद्धांत-शिरोमणि के पहले अध्याय (गोल-अध्याय) में, भुवन-कोश खंड में, नौ खंडों का वर्णन निम्न प्रकार से किया गया है:

ऐंद्रँ कशेरू सकलं किल ताम्रपर्णं

 अन्यद् गभस्तिमद् अतश च कुमारिकाख्यं

नागं च सौम्यं इह वारूणं अंत्य-खंडं

 गंधर्व-संज्ञं इति भारत-वर्ष-मध्ये

"भारत-वर्ष में, नौ खंड हैं। वे इस प्रकार हैं: (1) ऐंद्र, (2) कशेरू, (3) ताम्रपर्ण, (4) गभस्तिमत, (5) कुमारिका, (6) नाग, (7) सौम्य, (8) वरुण और (9) गंधर्व।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)