| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार » श्लोक 80 |
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| | | | श्लोक 3.19.80  | प्रफुल्लित वृक्ष - वल्ली , - येन वृन्दावन ।
शुक, शारी, पिक, भृङ्ग करे आलापन ॥80॥ | | | | | | | अनुवाद | | बगीचे में वृन्दावन के समान ही पुष्पित वृक्ष और लताएँ थीं। भौंरे और शुक, शारि और पिका जैसे पक्षी आपस में बातें कर रहे थे। | | | | The garden was full of flowers, trees, and creepers, just like Vrindavan. Bumblebees, parrots, harriers, and hawks chattered among themselves. | | ✨ ai-generated | | |
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