श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.19.71 
शङ्कर करेन प्रभुर पाद - सम्वाहन ।
घुमाञा पड़ेन, तैछे करेन शयन ॥71॥
 
 
अनुवाद
शंकर जी श्री चैतन्य महाप्रभु के पैरों की मालिश करते थे, लेकिन मालिश करते समय उन्हें नींद आ जाती थी और वे लेट जाते थे।
 
Shankara would massage the feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu, but while massaging the feet he would fall asleep and would lie down like this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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