श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु का अचिन्त्य व्यवहार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.19.6 
“नदीया चलह, मातारे कहिह नमस्कार ।
आमार नामे पाद - पद्म धरिह ताँहार ॥6॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने जगदानंद पंडित से कहा, "नादिया जाओ और मेरी माँ को मेरा प्रणाम करो। मेरे नाम से उनके चरण कमलों को छुओ।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said to Jagadananda Pandit, "Go to Nadia and convey my regards to my mother. Touch her feet on my behalf."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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