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श्लोक 3.19.55  |
एइ - मत विलपिते अर्ध - रात्रि गेल ।
गम्भीराते स्वरूप - गोसाञि प्रभुरे शोयाइल ॥55॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु इस प्रकार विलाप करते हुए आधी रात बीत गई। तब स्वरूप दामोदर ने भगवान को गम्भीरा नामक कक्ष में सुला दिया। |
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| In this way, Sri Chaitanya Mahaprabhu lamented for half the night. Then Svarupa Damodara put him to sleep in a room called Gambhira. |
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